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Please read the below highcourt's judgement. posted on dainik jagran website.
अस्थायी कर्मचारी मुआवजे का हकदार नहीं : हाईकोर्टNov 03, 12:30 amबताएं
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नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : हाईकोर्ट ने कहा कि अस्थायी कर्मचारी मूल मालिक से मुआवजे पाने का दावा नहीं कर सकता है। वह भी तब जब कर्मचारी ठेकेदार के कहने पर उसके पर्यवेक्षण में काम कर रहा हो और दुर्घटनाग्रस्त हो जाए। जस्टिस वीबी गुप्ता ने कहा कि ऐसे लोग जो ठेकेदार के जरिए किसी प्रतिष्ठान या व्यवसाय में काम कर रहे हैं, वे चोट लगने की स्थिति में मुआवजा पाने के हकदार नहीं हैं।
मेसर्स भसीन पेट्रोल पंप द्वारा वर्कमैंस कंपनसेशन कमिश्नर के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में दायर हुई अपील का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किया गया है। कमिश्नर ने वर्कमैंस कंपनसेशन एक्ट के तहत मोहम्मद शोइबुद्दीन खान को कर्मचारी मानते हुए क्षतिपूर्ति संबंधी यह आदेश दिया था। खान मेसर्स विकास इलेक्ट्रॉनिक्स में बतौर इलेक्ट्रीशियन कार्यरत था, जिसने भसीन पेट्रोल पंप में बिजली की मरम्मत का ठेका लिया था। पेट्रोल पंप पर काम के दौरान खान हादसे में जख्मी हुआ और कुछ दिनों बाद 1995 में उसकी की मौत हो गई। वर्कमैंस कंपनसेशन कमिश्नर ने पेट्रोल पंप मालिक को निर्देश दिया था कि वह मरने वाले की मांग को 1.95 लाख रुपये बतौर मुआवजा दे। इसके बाद पेट्रोल पंप ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर अदालत ने कमिश्नर के आदेश को पलटते हुए कहा कि एक्ट के मुताबिक मरने वाला कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आता है। |